डेस्क: डीडी न्यूज का रंग लाल से हुआ केसरिया पर विवाद शुरू, विपक्ष ने कहा- ये प्रसार भारती नहीं, प्रचार भारती है

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

डीडी न्यूज़ के कथित ‘भगवाकरण’ को लेकर विपक्षी पार्टियां हमलावर हो गया हैं। जबकि ब्रॉडकास्ट का कहना है कि चैनल का लोगो सिर्फ सुंदरता के लिए बदला गया है, वहीं विपक्षी पार्टियों ने लोकसभा चुनाव से पहले ऐसा किए जाने पर सवाल उठाए हैं। मंगलवार को शाम को डीडी न्यूज़ ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर नए लोगो का वीडियो एक संदेश के साथ पोस्ट किया था। 
जिसमें लिखा गया था, “देखिए अपने पसंदीदा डीडी न्यूज़ को नए अवतार में, दावे नहीं, दिखलाते हैं तथ्य, दिखावा नहीं चुनते हैं सच. डीडी न्यूज़-भरोसा सच का.”

इसके तुरंत बाद 2012 से 2014 के बीच प्रसार भारती के सीईओ रहे तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद जवाहर सरकार ने कहा, “राष्ट्रीय प्रसारण दूरदर्शन ने अपने ऐतिहासिक फ्लैगशिप लोगो को भगवा रंग में रंग दिया है। पूर्व सीईओ के रूप में मैं इसके भगवाकरण को चिंता के साथ देख रहा हूं और महसूस कर रहा हूं कि यह अब प्रसार भारती नहीं बचा है, बल्कि यह प्रचार भारती है। ”

उन्होंने कहा, “यह सिर्फ लोगो की बात नहीं है, बल्कि सरकारी प्रसारक से जुड़ी हर चीज़ अब भगवा है। यहां सत्तारूढ़ पार्टी के कार्यक्रमों को ज़्यादा से ज़्यादा प्रसारण का समय मिलता है, जबकि विपक्षी पार्टियों को अब शायद ही यहां कोई जगह मिलती है। ” 
उन्होंने कहा कि यह सब सत्तारूढ़ बीजेपी की वजह से हो रहा है। इसके साथ ही जवाहर ने भगवाकरण का एक और उदाहरण देते हुए नई संसद में राज्यसभा हॉल का ज़िक्र किया। उन्होंने बताया कि पुरानी संसद में इमारत का रंग मैरून था, जो अब भगवा हो गया है। 

प्रसार भारती के CEO बोले- रंग नारंगी है, भगवा नहीं
प्रसार भारती के वर्तमान CEO गौरव द्विवेदी ने बातचीत में कहा- लोगो का रंग नारंगी है न कि भगवा। सिर्फ लोगो में ही बदलाव नहीं हुआ है, बल्कि हमने डीडी के पूरे लुक और फील को अपग्रेड किया गया है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि लोग इस बारे में अनर्गल टिप्पणी कर रहे हैं। हम पिछले छह-आठ महीने से डीडी के लुक और फील को बदलने पर काम कर रहे थे।

1959 में हुई थी दूरदर्शन की शुरुआत
दूरदर्शन की शुरुआत 15 सितंबर, 1959 में इंडियन टेलीविजन के रूप में हुई थी। पहले ये आकाशवाणी का ही हिस्सा था, लेकिन बाद में उससे अलग हो गया। यूनेस्को की मदद से शुरुआत में दूरदर्शन पर हफ्ते में दो दिन केवल एक-एक घंटे के कार्यक्रम प्रसारित होते थे। इनका उद्देश्य नागरिकों को जागरूक करना होता था। 

1965 में इसका रोजाना प्रसारण शुरू हुआ। समाचार आने लगे। फिर कृषि दर्शन आया, जो आज भी दूरदर्शन के अलग-अलग चैनलों पर प्रसारित होता है। चित्रहार पर फिल्मी गाने प्रसारित होते थे।

डीडी की सर्विस 1975 तक मुंबई, अमृतसर और अन्य शहरों तक बढ़ा दी गई। 1 अप्रैल 1976 को यह सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन आ गया और 1982 में नेशनल ब्रॉडकास्टर बन गया।
80 के दशक में दूरदर्शन घर-घर में छा गया। दूरदर्शन पर प्रसारित पहला सीरियल हम लोग था। इसके बाद इस पर प्रसारित होने वाले रामायण और महाभारत जैसे पौराणिक सीरियलों ने जबर्दस्त लोकप्रियता हासिल की। इन दोनों सीरियल के प्रसारण के समय देश में सड़कें वीरान हो जाया करती थीं। फिलहाल दूरदर्शन 6 नेशनल और 17 रीजनल चैनल ब्रॉडकास्ट करता है।

Leave a Comment