DESK : नवादा में टूट सकता है एनडीए का गढ़, लड़ाई विवेक व श्रवण में

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

परिसीमन के बाद 2009 में हुए संसदीय चुनाव से नवादा सीट पर जाति विशेष के लोग ही जीतते रहे है। इस सीट पर पूर्व मंत्री राजबल्लभ प्रसाद के परिवार के दबदबे को भी हर कोई स्वीकार करता है। लेकिन श्रवण कुशवाहा को नवादा और बगल की सीट मुंगेर से अशोक महतो की पत्नी को टिकट देकर लालू ने नवादा में लड़ाई रोचक कर दी है है। कुशवाहा वोटरों द्वारा अपनी जाति के उम्मीदवार को वोट देने की टेंडेंसी यहां भी दिख रही है। वहीं, इसी क्षेत्र के होने के कारण कुर्मी जाति के अशोक महतो की यहां के कुर्मियों पर खासी पकड़ है।यहां यादव और लव-कुश वोटों में विभाजन रोकना, इन दोनों वोटों के दावेदार लालू प्रसाद और नीतीश कुमार के लिए अग्नि-परीक्षा के समान है। श्रवण इस लव-कुश को एकजुट करने की हर दम कोशिश भी कर रहे हैं। अशोक महतो के प्रभाव का पूरा इस्तेमाल कर रहे हैं।

विवेक ठाकुर वोटरों के पास अंदर तक नहीं पहुंच पा रहे हैं

भाजपा प्रत्याशी विवेक ठाकुर के पिता डा. सीपी ठाकुर की कर्मभूमि पटना जिला रही है। ठाकुर परिवार उत्तर बिहार का रहने वाला है। ऐसे में लोकल नहीं होने के कारण भाजपा के वोटरों के पास अंदर तक विवेक नहीं पहुंच पा रहे हैं। वैसे वो पूरा जोर लगा रहे हैं और पीएम की सभा के बाद उनके लिए स्थिति कुछ सामान्य हुई है। बरबीघा, हिसुआ, वारिसलीगंज और नवादा में उन्होंने डोर टू डोर घूमना शुरू भी कर दिया है।

नवादा एनडीए का रहा गढ़ 

भाजपा से 2009 में जीते भोला सिंह, 2014 में जीते गिरिराज सिंह के बाद विवेक 2024 में भाजपा से तीसरे भूमिहार सांसद बनने के लिए कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। 2019 में भी भूमिहार जाति के ही चंदन सिंह यहां से लोजपा से सांसद बने थे। इस चुनाव में देखना है कि यह ट्रेंड कायम रहता है कि बदलता है।

नवादा में सुविधाओं का अभाव 
नवादा में न तो जिला अस्पताल है, न ही केन्द्रीय विद्यालय। अब तक जिले में मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा तक नहीं हुई है। न ढंग का स्टेडियम है, न ही लोगों के घूमने के लिए कोई पार्क। गर्मी में पेयजल ही बड़ी समस्या बनी हुई है। ककोलत जलप्रपात लोग जाते थे पर वो भी पुनर्निर्माण के लिए बंद कर है। हां, सड़कों के मामले में नवादा की स्थिति ठीक है।

खबरें और भी है—

डेस्क: लोकसभा चुनाव- 2024: चुनावी संसाधन में कमी के बावजूद “जीजा” पर भारी अर्चना 

1 thought on “DESK : नवादा में टूट सकता है एनडीए का गढ़, लड़ाई विवेक व श्रवण में”

  1. Dear Chandan Jee please mind your note and please you write your note with limitation and please hedge your words yours one word and sentence can change the theme and scene of our society a word about me you wrote that is not correct before writing you should also contact me so that public of your views could accept you and. Either your TRP can go down either it’s your choice you can change your attitude and eradicate your. Negative approach that s good rest is your choice jgd

    Reply

Leave a Comment