शेखपुरा: रॉकेट विज्ञान में डॉक्टर की उपाधि से सम्मानित हुए मो. गुलाम सरवर 

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किस्को स्टोनी लैन एलिमेंट्री पब्लिक स्कूल के डायरेक्टर व शेखपुरा जिला निवासी मो.गुलाम सरवर ने बीआईटी मेसरा, रांची के प्रतिष्ठित अंतरिक्ष इंजीनियरिंग और रॉकेट्री विभाग में रॉकेट साइंस में पीएचडी पूरी की। उनका अभूतपूर्व शोध रॉकेट और मिसाइलों सहित उच्च गति वाले वाहनों के नाक शंकु डिजाइन पर केंद्रित है। उनके असाधारण कार्य को प्रतिष्ठित एआईएए जर्नल (अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ एरोनॉटिक्स एंड एस्ट्रोनॉटिक्स) में एक शोध पत्र के प्रकाशन से मान्यता मिली है। उनके इस सफलता पर लोगों ने बधाई दी है। मो.गुलाम सरवर शेखपुरा नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड में 33 के स्व.मोजिब उर्र रहमान एवं माता स्व.रौशन आरा के पुत्र है। उनके भाई का नाम शम्स तबरेज और अबू तालिब (गुड्डू) है। उनकी शिक्षा-दीक्षा एकसारी मिडिल स्कूल के बाद डीएवी कतरास से हाई एजुकेशन प्राप्त कर बीआईटी मेसरा रांची में हुई। साथ ही मो.गुलाम सरवर ने आगे चलकर किस्को के बच्चों के उज्जवल भविष्य बनाने के लिए ख्वाहिश जताते हुए कहा कि स्टोनी लैन के बच्चों को भी अपने जैसे ही शोधकर्ता बनाना है। इसके अलावा उन्होंने स्थायी समिति ने प्रसिद्ध भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग में इंस्टीट्यूट पोस्ट डॉक्टरल फेलो के रूप में नियुक्ति के लिए मो.गुलाम सरवर की सिफारिश की है। यह प्रतिष्ठित फैलोशिप क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए सरवर की विशेषज्ञता और समर्पण का प्रमाण है। मो. गुलाम सरवर को आईआईटी कानपुर में भारत की पहली हाइपर वेलोसिटी एक्सप्रेशन टनल परीक्षण सुविधा में काम करने का मौका मिला। आईआईटी कानपुर में उनका आगामी काम हाइपरसोनिक गति के क्षेत्र में उतरेगा, हाइपरसोनिक मिसाइलों के लिए अनुप्रयोगों की खोज करेगा। बीआईटी मेसरा से आईआईटी कानपुर तक मो.गुलाम सरवर की यात्रा सिर्फ एक व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि एयरोस्पेस इंजीनियरिंग और रॉकिटरी को आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण प्रगति है। उनकी कहानी दृढ़ संकल्प, उत्कृष्टता और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में ज्ञान की खोज में से एक है। 

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